Sunday, August 1, 2010

इन्हे जंगल में ही रहने दो!

जब हम इतने स्वार्थी और क्रूर हो गये है तो फ़िर क्यो इन हाथियों को जंगलों से पकड़ कर पालतू बनाते है, ताकि ये हमारा बोझ ढो सके! क्यों अलग करते इनके परिवारों से और ट्र्निंग के दौरान असहनीय पीड़ा से गुजारते इस प्राणी को, लाखों भाले चुभने का दर्द, लाखों चीत्कारों के बाद जब यह आदी हो जाता है हमारा हुक्म मानने के लिए....वर्षों वफ़ादारी से हमारा बोझ उठाता है, पर जब यह बूढ़ा, लाचार और बीमार होता है, तब हम अपनी जिम्मेदारी से भाग लेते है...इसे विवश और बीमार छोड़कर....कुछ ऐसा ही हुआ लखनऊ चिड़ियाघर से दुधवा लाये गये सुमित के साथ!

कृष्ण कुमार मिश्र

विभागों की गैर-जिम्मेदाराना हरकतों का शिकार बना सुमित!

कृष्ण कुमार मिश्र

Thursday, June 10, 2010

डिग्निटी डायलॉग में सरेली गाँव में पक्षी सरंक्षण की एक कहानी!

डिग्निटी डायलॉग में सरेली गाँव में पक्षी सरंक्षण की एक कहानी!
Dignity Dialogue Magazine Issue May 2010.

कृष्ण कुमार मिश्र
मैनहन-262727