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Tuesday, November 6, 2012
Sunday, October 28, 2012
Friday, August 12, 2011
फ़ूल जो कैद थे रईशों के गरूर की चारदीवारी में?
मैनहन गाँव - फ़ुलवारियों की एक कथा-
अतीत से वर्तमान तक.....
जनसत्ता अखबार में "फ़ूलों का आँगन" शीर्षक के साथ 9 अगस्त 2011 को संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशित मेरा लेख जो फ़ूलों के सांस्कृतिक महत्व के अतरिक्त आम-जनमानस में फ़ुलवारियों के प्रति विरक्तता पर आधारित है, आखिर वे क्यों दूर रहे पुष्पों से और आज भी क्यों महरूम है फ़ूलों और उनकी मदमाती सुगन्ध से... ये लेख जंगल कथा ब्लॉग से लिया गया है।...कृष्ण कुमार मिश्र
Sunday, July 3, 2011
Wednesday, February 9, 2011
बंजर जमीनों की निगेहबानी कौन करे ?
बंजर जमीनों की निगेहबानी कौन करे ? छत्तीसगढ़ से प्रकाशित साप्ताहिक पत्रिका इतवारी अखबार (6 फ़रवरी 20011) में प्रकाशित लेख:
इतवारी अखबार, 6 फ़रवरी 2011, पृष्ठ संख्या 26
ब्लाग्स इन मीडिया डॉट कॉम में सन्दर्भित इस आलेख को देखने के लिए यहाँ क्लिक करें
इतवारी अखबार, 6 फ़रवरी 2011, पृष्ठ संख्या 26
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कृष्ण कुमार मिश्र
77, कैनाल रोड, शिव कालोनी
लखीमपुर खीरी-262701
फ़ोन- 09451925997
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Wednesday, September 15, 2010
Thursday, June 10, 2010
उदन्ती में गौरैया
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Friday, April 16, 2010
Monday, March 29, 2010
Sunday, January 10, 2010
...........जब सुहेली भी ठहरी नज़र आई
हिन्दुस्तान में ६ जनवरी २०१० को प्रकाशित श्रद्धाजंली।
पद्म भूषण कुँवर बिली अर्जन सिंह(१५ अगस्त १९१७-०१ जनवरी २०१०)
पद्म भूषण कुँवर बिली अर्जन सिंह(१५ अगस्त १९१७-०१ जनवरी २०१०)
कृष्ण कुमार मिश्र
मैनहन
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