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Friday, August 12, 2011

फ़ूल जो कैद थे रईशों के गरूर की चारदीवारी में?

मैनहन गाँव - फ़ुलवारियों की एक कथा-

अतीत से वर्तमान तक.....

जनसत्ता अखबार में "फ़ूलों का आँगन" शीर्षक के साथ 9 अगस्त 2011 को संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशित मेरा लेख जो फ़ूलों के सांस्कृतिक महत्व के अतरिक्त आम-जनमानस में फ़ुलवारियों के प्रति विरक्तता पर आधारित है, आखिर वे क्यों दूर रहे पुष्पों से और आज भी क्यों महरूम है फ़ूलों और उनकी मदमाती सुगन्ध से...   ये लेख जंगल कथा ब्लॉग से लिया गया है।...कृष्ण कुमार मिश्र


Saturday, February 12, 2011

फ़ुलवाड़ियों की एक अनकही दास्तान !


जो रईशों के घर आँगन में खिलने का गरूर रखते हैं ! लेख छत्तीसगढ़ रायपुर से प्रकाशित साप्ताहिक पत्रिका इतवारी खबर में 30 जनवरी 2011 को प्रकाशित हुआ, यह लेख जंगल कथा ब्लॉग से लिया गया हैं।

इतवारी खबर (30 जनवरी 2011) पृष्ठ संख्या 29


इतवारी खबर (30 जनवरी 2011) पृष्ठ संख्या 30

इतवारी खबर (30 जनवरी 2011) पृष्ठ संख्या 31


कृष्ण कुमार मिश्र
मैनहन-262727
जनपद-खीरी
भारत