मेरा यह लेख १५ अक्टूबर सन २००६ में दैनिक हिन्दुस्तान लखनऊ में प्रकाशित हुआ।
पद्म श्री बिली अर्जन सिंह ने अपने छोटे भाई बलराम सिंह व उनकी पत्नी मीरा बलराम सिंह के नाम पर एक पुरस्कार की शुरूवात की थी। यह पुरस्कार प्रत्येक वर्ष पर्यावरण व वन्य-जीवन के संरक्षण में अहम भूमिका निभाने वाले सरकारी व गैर-सरकारी व्यक्तियों व संस्थाओं को दिया जाता है।
यहां यह बता देना जरूरी हो जाता है कि बलराम सिंह ने एक बैश्विक कार कम्पनी के उच्च पद को त्याग कर टाइगर हावेन में बिली के साथ मिलकर वन्य-जीवों के लिए स्मरणीय कार्य किए और उनकी पत्नी मीरा बलराम सिंह ने उनके कार्यों को बलराम सिंह के बाद भी जारी रखा। सन २००७ में मीरा बलराम सिंह का भी निधन दुबई में हुआ। जहां वह अपने बेटे के साथ रहती थी।
मीरा बलराम सिंह ने अपने पति की मृत्यु के बाद बिली की पुस्तके टाइप करने में मदद करना और टाइगर हावेन की साज-सज्जा का खयाल रखना उनके प्रिय कार्यों में था। मीरा जी का टाइगर हावेन में क्रिसमस पार्टी का आयोजन काफ़ी लोकप्रिय था उनके मित्रों और आस-पास के लोगों में।
कुँवर बिली अर्जन सिंह के पश्चात अब इस पुरस्कार की गरिमा और इसका वितरण जारी रहेगा या यह पुरस्कार भी अपने प्रणेता के साथ अपना अस्तित्व खो देगा ये आने वाला समय बतायेगा।
कृष्ण कुमार मिश्र
मैनहन-भारत