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Sunday, October 28, 2012
Thursday, September 13, 2012
नदियां कभी वापस नही आती
नदियां कभी वापस नही आती-
-कृष्ण कुमार मिश्र
डेली न्यूज एक्टीविस्ट अखबार के संपादकीय पृष्ठ पर 10 सितम्बर 2012 को प्रकाशित लेख
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-कृष्ण कुमार मिश्र
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Friday, August 12, 2011
फ़ूल जो कैद थे रईशों के गरूर की चारदीवारी में?
मैनहन गाँव - फ़ुलवारियों की एक कथा-
अतीत से वर्तमान तक.....
जनसत्ता अखबार में "फ़ूलों का आँगन" शीर्षक के साथ 9 अगस्त 2011 को संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशित मेरा लेख जो फ़ूलों के सांस्कृतिक महत्व के अतरिक्त आम-जनमानस में फ़ुलवारियों के प्रति विरक्तता पर आधारित है, आखिर वे क्यों दूर रहे पुष्पों से और आज भी क्यों महरूम है फ़ूलों और उनकी मदमाती सुगन्ध से... ये लेख जंगल कथा ब्लॉग से लिया गया है।...कृष्ण कुमार मिश्र
Sunday, July 3, 2011
Saturday, February 26, 2011
बरवर का ध्वस्त साम्राज्य
मैनहन विलेज ब्लाग से लिया गया लेख "बरवर का ध्वस्त साम्राज्य" पृष्ठ संख्या 1 जो 9 जनवरी 2011 के इतवारी अखबार पत्रिका में प्रकाशित हुआ।
कृष्ण कुमार मिश्र
Saturday, February 12, 2011
फ़ुलवाड़ियों की एक अनकही दास्तान !
जो रईशों के घर आँगन में खिलने का गरूर रखते हैं ! लेख छत्तीसगढ़ रायपुर से प्रकाशित साप्ताहिक पत्रिका इतवारी खबर में 30 जनवरी 2011 को प्रकाशित हुआ, यह लेख जंगल कथा ब्लॉग से लिया गया हैं।
इतवारी खबर (30 जनवरी 2011) पृष्ठ संख्या 29
इतवारी खबर (30 जनवरी 2011) पृष्ठ संख्या 30
इतवारी खबर (30 जनवरी 2011) पृष्ठ संख्या 31
कृष्ण कुमार मिश्र
मैनहन-262727
जनपद-खीरी
भारतThursday, February 10, 2011
केवलादेव घाना
केवलादेव घाना: भरतपुर, राजस्थान
केवलादेव घाना: भरतपुर बर्ड पैराडाइज का एक यात्रा वृतान्त जो दुधवा लाइव में प्रकाशित हुआ, तत्पश्चात छत्तीसगढ़ रायपुर से प्रकाशित इतवारी अखबार (मासिक पत्रिका) में यह लेख 2 जनवरी 2011 को प्रकाशित हुआ।
इतवारी अखबार (मासिक पत्रिका) पृष्ठ सख्या 38
इतवारी अखबार (मासिक पत्रिका) पृष्ठ सख्या 39
इतवारी अखबार (मासिक पत्रिका) पृष्ठ सख्या 40
इतवारी अखबार (मासिक पत्रिका) पृष्ठ सख्या 41
कृष्ण कुमार मिश्र
77, कैनाल रोड, शिव कालोनी
लखीमपुर-खीरी-262701
फ़ोन-09451925997
केवलादेव घाना: भरतपुर बर्ड पैराडाइज का एक यात्रा वृतान्त जो दुधवा लाइव में प्रकाशित हुआ, तत्पश्चात छत्तीसगढ़ रायपुर से प्रकाशित इतवारी अखबार (मासिक पत्रिका) में यह लेख 2 जनवरी 2011 को प्रकाशित हुआ।
इतवारी अखबार (मासिक पत्रिका) पृष्ठ सख्या 38
इतवारी अखबार (मासिक पत्रिका) पृष्ठ सख्या 39
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Wednesday, February 9, 2011
बंजर जमीनों की निगेहबानी कौन करे ?
बंजर जमीनों की निगेहबानी कौन करे ? छत्तीसगढ़ से प्रकाशित साप्ताहिक पत्रिका इतवारी अखबार (6 फ़रवरी 20011) में प्रकाशित लेख:
इतवारी अखबार, 6 फ़रवरी 2011, पृष्ठ संख्या 26
ब्लाग्स इन मीडिया डॉट कॉम में सन्दर्भित इस आलेख को देखने के लिए यहाँ क्लिक करें
इतवारी अखबार, 6 फ़रवरी 2011, पृष्ठ संख्या 26
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कृष्ण कुमार मिश्र
77, कैनाल रोड, शिव कालोनी
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Tuesday, February 8, 2011
टाइगरमैन बिली अर्जन सिंह
छत्तीसगढ़ रायपुर से प्रकाशित उदन्ती मासिक पत्रिका (जनवरी 2011) में टाइगरमैन बिली अर्जन सिंह पर एक आलेख:
बिली अर्जन सिंह (15/08/1917-01/01/2010) की प्रथम पूर्ण्यतिथि पर उन्हे भावभीनी श्रंद्धाजली ।
कृष्ण कुमार मिश्र
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Wednesday, September 15, 2010
Sunday, August 1, 2010
इन्हे जंगल में ही रहने दो!
जब हम इतने स्वार्थी और क्रूर हो गये है तो फ़िर क्यो इन हाथियों को जंगलों से पकड़ कर पालतू बनाते है, ताकि ये हमारा बोझ ढो सके! क्यों अलग करते इनके परिवारों से और ट्र्निंग के दौरान असहनीय पीड़ा से गुजारते इस प्राणी को, लाखों भाले चुभने का दर्द, लाखों चीत्कारों के बाद जब यह आदी हो जाता है हमारा हुक्म मानने के लिए....वर्षों वफ़ादारी से हमारा बोझ उठाता है, पर जब यह बूढ़ा, लाचार और बीमार होता है, तब हम अपनी जिम्मेदारी से भाग लेते है...इसे विवश और बीमार छोड़कर....कुछ ऐसा ही हुआ लखनऊ चिड़ियाघर से दुधवा लाये गये सुमित के साथ!
कृष्ण कुमार मिश्र
कृष्ण कुमार मिश्र
Sunday, April 4, 2010
Wednesday, March 3, 2010
गौरैया के बिना सूना घर आँगन- रवीश कुमार
3 फ़रवरी 2010 को हिन्दुस्तान दैनिक में, रवीश कुमार जी का दुधवालाइव डाट कॉम पर आधारित विश्लेषणात्मक लेख ।
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Sunday, January 10, 2010
...........जब सुहेली भी ठहरी नज़र आई
हिन्दुस्तान में ६ जनवरी २०१० को प्रकाशित श्रद्धाजंली।
पद्म भूषण कुँवर बिली अर्जन सिंह(१५ अगस्त १९१७-०१ जनवरी २०१०)
पद्म भूषण कुँवर बिली अर्जन सिंह(१५ अगस्त १९१७-०१ जनवरी २०१०)
कृष्ण कुमार मिश्र
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