Monday, March 29, 2010

गौरैया बचाओ जन अभियान


29 मार्च 2010 को हिन्दुस्तान दैनिक लखनऊ से प्रकाशित खबर में दुधवा लाइव का "गौरैया मिशन 2010"

Wednesday, March 3, 2010

गौरैया के बिना सूना घर आँगन- रवीश कुमार

3 फ़रवरी 2010 को हिन्दुस्तान दैनिक में, रवीश कुमार जी का दुधवालाइव डाट कॉम पर आधारित विश्लेषणात्मक लेख ।

Saturday, February 27, 2010

मुश्किल में बाघ- जनसत्ता संपादकीय

फ़रवरी २७, २०१० को जनसत्ता दैनिक के संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशित दुधवा लाइव का यह लेख, बाघों और उनके आवासों के विषय पर आधारित है।---कृष्ण कुमार मिश्र

Saturday, February 20, 2010

डेली न्यूज़ एक्टीविस्ट में प्रकाशित " दुधवा लाइव"

20, फ़रवरी 2010 को डेली न्यूज़ एक्टीविस्ट में दुधवा लाइव का एक लेख प्रकाशित हुआ, जिसे यहाँ पर पोस्ट कर रहा हूँ।

Thursday, February 18, 2010

दुधवा लाइव: वन्य-जीवन पर भारत की पहली हिन्दी पत्रिका

 http://dudhwalive.com
दुधवा लाइव पत्रिका का सृजन उन कारणों की परिणित है, जिन्हे सरकारें व समाज़ के जिम्मेदार लोग नज़र्-ए-अन्दाज करते है। हम अपनी राष्ट्रीय प्राकृतिक संपदा के संरक्षण व संवर्धन की इस मुहिम में आप सभी को आमंत्रित करते है, जो अपने चारों तरफ़ की उन सभी गतिविधियों को देखते है, और विचार भी करते है। किन्तु बेबाकी से उस बात की अभिव्यक्ति नही कर पाते या फ़िर मीडिया के बदलते परिवेश में ऐसी महत्वपूर्ण खबरों व लेखों को जगह नही मिल पाती है। हम आप से वादा करते है कि हम आप की बात को उसके नियत स्थल तक पहुंचाने की भरसक कोशिश करेंगे। हमारी धरती की छिन्न-भिन्न होती दशा-व्यथा, वनों और उनके इतिहास, जैव-विविधिता, प्राकृतिक संपदा और उससे जुड़ा हमारा ज्ञान , जीवों पर हो रहे अत्याचार आदि महत्वपूर्ण मुद्दों की तस्वीर दुधवा लाइव के जरिए लोगों तक पहुंचायेंगे। ये एक ऐसा मंच होगा जो संरक्षित वनों व वन्य जीवों के अलावा हमारे गाँव-जेवार के पशु-पक्षियों और खेत-खलिहानों की बाते करेगा। ग्रामीण अंचल के लोगों के प्राकृतिक ज्ञान की बौद्धिक संपदा के संरक्षण को हम प्राथमिकता देंगे। इन प्रयासों में हमें आप सभी का निरन्तर सहयोग चाहिए, तभी जाकर हम अपने सही लक्ष्य को प्राप्त कर सकेंगे।


बापू के शब्दों के साथ  "किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है।"
धन्यवाद
संपादक/माडरेटर
दुधवा लाइव 
dudhwalive@live.com
कृष्ण कुमार मिश्र

Sunday, January 24, 2010

बसन्त पंचमी के दिन को हम राष्ट्रीय अवधी दिवस की तरह क्यों न मनायें।

इसी दिन अवधी सम्राट पं० बशीधर शुक्ल का जन्म हुआ था। आजादी के इस नायक ने ही सुभाष चन्द्र बोस की आजाद हिन्द फ़ौज को लांग मार्च गीत दिया...कदम कदम बढ़ाये जा, खुशी के गीत गाये जा। इन्ही के उस गीत की आवाज ने करोड़ों हिन्दुस्तानियों को सदियों की नीद से जगाने का काम किया....उठो सोने वालों सबेरा हुआ है............एक और गीत जिसे साबरमती आश्रम की भोर प्रार्थना बनाया गया...उठ जाग मुसाफ़िर भोर भई, अब रैन कहां जो सोवत है।

अवधी भाषा में उनकी कवितायें समाज के सभी वर्गों का और प्रकृति के सभी पहुलुओं को छूती ही नही है वरन उनकी पीड़ा और खूबसूरती का सजीव चित्रण किया है। यहां मैं अपना एक लेख जो अमृत वर्षा दैनिक नई दिल्ली से 23 जनवरी सन 2010 ईस्वी को प्रकाशित हुआ, जिसकी कतरन यहां चिपका रहा हूं। ताकि तराई के जनपद के इस भाषा मर्मग्य व स्वतंत्रता सेनानी से आप सब परिचित हो सके।








Friday, January 15, 2010

दो फ़न वाला दुर्लभ रसेल वाइपर

१३ अगस्त सन २००६ को दैनिक हिन्दुस्तान लखनऊ से प्रकाशित मेरा लेख, जो एक बेहतरीन और अदभुत जानकारी देता है, भारत के शेषनागों के बारे में, संभवता यह पहला रिकार्ड है भारत  के जीव-जगत में, दो सिर वाला वाइपर सर्प। खीरी के एक गांव में ये जीव दिखाई पड़ा और ग्रामीणों ने तुरन्त इसे महादेव के मन्दिर में रखकर पूजा-अर्चना प्रारम्भ कर दी, आखिर महादेव के प्रिय सर्पों में यह तो शे्षनाग का अवतार था!
खैर अब आप सोचियें कि एक शरीर में दो मस्तिष्क और दो मुँह वाला जीव,  भोजन मिलने पर क्या करेगें।
दोनों मुंह आपस में लड़ेगें?
या समन्वय स्थापित करेगें?
विस्तृत जानकारी के लिए लेख पढ़िए।